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गडरिया का इतिहास 

पाल वंश के गडरिया का इतिहास.   
Gadariya ka itihaas (pal vansh)

            

गडरिया का इतिहास इस सीरीज में हम आज सबसे पहला जो वंश है। पाल राजाओं के समय में बौद्ध धर्म को संरक्षण मिला । पाल राजाओं का धर्म हिंदू था उन्होंने हिंदू धर्म को आगे बढ़ाने के लिए शिव मंदिरों का निर्माण कराया। शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों का निर्माण कराया यह पूर्व मध्यकालीन राजवंश था। जब हर्षवर्धन के काल में राजनीतिक आर्थिक सामाजिक संकट उत्पन्न हो गया तब बिहार बंगाल उड़ीसा के क्षेत्र में पूरी तरह अराजकता फैल गई थी पालने बंगाल में एक स्वतंत्र राज्य घोषित किया जो जनता द्वारा गोपाल को सिंहासन पर राजमान किया गया था। यह योग्य और कुशल शासक थे।पाल वंश उत्तरी भारत का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता है


                    पाल वंश की स्थापना 


 पश्चिम बंगाल के खलीलपुर लेख के अनुसार कन्नौज के सम्राट हर्षवर्धन और आसाम के राजा भास्कर वर्मा के द्वारा संपूर्ण गौड़ वंश को नष्ट कर देने के बाद बंगाल में अव्यवस्था फैल गई थी। 750 ई0 मैं बंगाल के सामंतों और जनता की सर्वसम्मति से गोपाल को राजा बनाया गया राजा बनने के बाद इन्होंने पाल वंश की स्थापना की परंतु भारतीय इतिहासकार पाल वंश को क्षत्रिय वंश नहीं मानते हैं लेकिन पाल वंश के अभिलेखों में पाल राजाओं को सूर्यवंश की शाखा बताया गया है

                              गोपाल

गोपाल को पाल वंश का संस्थापक तथा पहला स्वतंत्र राजा माना जाता है 
गोपाल का शासनकाल संभवत: 750 से 770 ईसवी माना जाता है
धर्मपाल के द्वारा बनवाए गए बंगाल के खलीलपुर लेख  में भोपाल के शासनकाल की जानकारी प्राप्त होती है।

पाल वंश के ऐतिहासिक स्रोत
अर्थात हमें पाल वंश के बारे में जानकारी कहां से मिलती है।

अभिलेख

*धर्मपाल का खलीलपुर लेख
*देव पाल का मुंगेर लेख
*महिपाल का मुजफ्फरपुर तथा वागगढ़ लेख
*नारायण पाल का देवघर लेख
आदि।

                              साहित्य 
जिसमें पाल राजाओं का उल्लेख किया गया है।

1.गुजराती कवि सोठडल की उदय सुंदरी कथा
2.संध्याकर  नंदी का रामचरित्र ग्रंथ
3.तिब्बती बौद्ध गुरु तारानाथ के लेख
4.अरब यात्री सुलेमान के लेख

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