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थॉमस एल्वा एडिसन की जीवनी

        थॉमस एल्वा एडिसन की जीवनी ★★★ थॉमस एल्वा एडिसन महान एक अमरीकी आविष्कारक एवं व्यवसायी थे। संपूर्ण विश्व मे अपनी महानतम उपलब्धियो के लिए जाने वाले इस महान वैज्ञानिक (scientist) के नाम पर 1093 आविष्कारो के पेटेंट दर्ज हैं। विद्युत-बल्ब का अविष्कार करने के कारण इन्हे विश्वभर मे प्रकाश का फरिश्ता कहा जाता हैं। थॉमस एल्वा एडिसन का जन्म 11 फरवरी 1847 में अमेरिका के ओहियो शहर के मिलान गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम सेमुएल एडिसन और माँ का नाम नैन्सी एलियट था। एडिसन अपने माता-पिता की सात संतानों में से सबसे छोटे थे। इनके पिता ने हर प्रकार के व्यवसाय करने का प्रयास किया लेकिन उन्हे किसी मे भी सफलता ना मिली। जिस समय एडिसन की उम्र सात वर्ष की थी, तब उनका परिवार पोर्ट ह्यूरोंन, मिशिगेज चला गया, जहा पर उनके पिता एक बढाई के रूप में फोर्ट ग्रेरियेट में नियुक्त किये गये थे। एडीसन बचपन मे बहुत कमजोर थे और उनका व्यक्तित्व बहुत जटिल था। लेकिन इनका मस्तिष्क सदा पश्नो से भरा रहता था। वह किसी भी चीज़ को तबतक नही मानते थे जब तक उसका स्वंय परीक्षण न कर ले। इस प्रकार के दृष्टिकोण के...

मेजर ध्यान चंद की कहानी in Hindi

. मेजर ध्यान चंद की कहानी ★★★ हॉकी के जादूगर के नाम से प्रसिद्ध मेजर ध्यान चंद बहु प्रतिष्ठित बेहतरीन हॉकी प्लेयर थे। गोल करने की उनके क्षमता अद्भुत थी और अक्सर विरोधी टीम भारत के इस खिलाडी के सामने घुटने टेकते हुए नजर आते थे। 29 अगस्त को आने वाला उनका जन्मदिन भारत में राष्ट्रिय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है और भारत के राष्ट्रपति ने भी उन्होंने राजीव गाँधी खेल रत्न, अर्जुन और द्रोणाचार्य अवार्ड से इस दिन सम्मानित भी किया गया है। हॉकी फील्ड में तीन ओलिंपिक मैडल जीतने वाला, भारतीय हॉकी खिलाडी ध्यान चंद बेशक हॉकी के सबसे बेहतरीन और हराफनौला खिलाडी थे। वे उस समय भारतीय अंतरराष्ट्रीय हॉकी टीम के सदस्य थे, जिस समय भारतीय हॉकी टीम ने पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाया हुआ था। एक खिलाडी के रूप में गोल करने की उनकी शैली और कला दुसरे सभी खिलाडियों से बिल्कुल अलग और अद्भुत थी। इसीलिए उन्हें “हॉकी के जादूगर” के नाम से भी जाना जाता है। हर मैच में हॉकी की गेंद पर उनकी अद्भुत पकड़ होती थी और गेंद को घसीटने में भी वे बेहतर थे। बल्कि गेंद को घसीटने की उनकी कला अविश्वसनीय थी। लोग उन्हें हॉकी की स्टिक स...

अल्बर्ट आइन्स्टाइन की जीवनी in Hindi

. अल्बर्ट आइन्स्टाइन की जीवनी ★★★ आधुनिक भौतिक विज्ञान के जन्मदाता अल्बर्ट आइन्स्टाइन ने भौतिक विश्व को उसके यतार्थ स्वरूपों में ही समझने का प्रयास किया था। इस सम्बन्ध में उन्होंने कहा था कि “शब्दों का भाषा को जिस रूप में लिखा या बोला जाता है मेरी विचार पद्दति में उनकी उस रूप में कोई भूमिका नही है। पारम्परिक शब्दों अथवा अन्य चिन्हों के लिए दुसरे चरण में मात्र तब परिश्रम करना चाहिए जब सम्बंधिकरण का खेल फिर से दोहराया जा सके ”। ★★ अल्बर्ट आइन्स्टाइन का प्रारम्भिक जीवन - अल्बर्ट आइन्स्टाइन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी के उल्क नामक छोटे से कस्बे में हुआ था। उनके पिता का नाम हर्मन आइन्स्टाइन और माता का नाम पौलिन था। पौलीन को अपने पुत्र से बहुत प्यार था और कभी वो उसको अपने से दूर नही करती थी। एल्बर्ट तीन वर्ष का हुआ तो उसकी माता के लिए एक समस्या खडी हो गयी कि वो बोलता नही था। सामान्यत: तीन वर्ष के बालक तुतलाकर बोलना सीख जाते है। फिर भी माँ ने उम्मीद नही छोडी और उसे पियानो बजाना सिखाया। बचपन में एल्बर्ट शांत स्वाभाव का और शर्मीला बच्चा था और उसका कोई मित्र नही था। वह अपने पडोस में रहने वाल...

विक्रम और बेताल part :-1

विक्रम और बेताल बहुत पुरानी बात है। धारा नगरी में गंधर्वसेन नाम का एक राजा राज करते थे। उसके चार रानियाँ थीं। उनके छ: लड़के थे जो सब-के-सब बड़े ही चतुर और बलवान थे। संयोग से एक दिन राजा की मृत्यु हो गई और उनकी जगह उनका बड़ा बेटा शंख गद्दी पर बैठा। उसने कुछ दिन राज किया, लेकिन छोटे भाई विक्रम ने उसे मार डाला और स्वयं राजा बन बैठा। उसका राज्य दिनोंदिन बढ़ता गया और वह सारे जम्बूद्वीप का राजा बन बैठा। एक दिन उसके मन में आया कि उसे घूमकर सैर करनी चाहिए और जिन देशों के नाम उसने सुने हैं, उन्हें देखना चाहिए। सो वह गद्दी अपने छोटे भाई भर्तृहरि को सौंपकर, योगी बन कर, राज्य से निकल पड़ा। उस नगर में एक ब्राह्मण तपस्या करता था। एक दिन देवता ने प्रसन्न होकर उसे एक फल दिया और कहा कि इसे जो भी खायेगा, वह अमर हो जायेगा। ब्रह्मण ने वह फल लाकर अपनी पत्नी को दिया और देवता की बात भी बता दी। ब्राह्मणी बोली, “हम अमर होकर क्या करेंगे? हमेशा भीख माँगते रहेंगें। इससे तो मरना ही अच्छा है। तुम इस फल को ले जाकर राजा को दे आओ और बदले में कुछ धन ले आओ।” यह सुनकर ब्राह्मण फल लेकर राजा भर्तृहरि के पास गया और सारा हा...

gadariya king of pal vansh, पाल वंश गडरिया गडरिया का इतिहास, पाल वंश का इतिहास

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गडरिया का इतिहास  पाल वंश के गडरिया का इतिहास.    Gadariya ka itihaas (pal vansh)              गडरिया का इतिहास इस सीरीज में हम आज सबसे पहला जो वंश है। पाल राजाओं के समय में बौद्ध धर्म को संरक्षण मिला । पाल राजाओं का धर्म हिंदू था उन्होंने हिंदू धर्म को आगे बढ़ाने के लिए शिव मंदिरों का निर्माण कराया। शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों का निर्माण कराया यह पूर्व मध्यकालीन राजवंश था। जब हर्षवर्धन के काल में राजनीतिक आर्थिक सामाजिक संकट उत्पन्न हो गया तब बिहार बंगाल उड़ीसा के क्षेत्र में पूरी तरह अराजकता फैल गई थी पालने बंगाल में एक स्वतंत्र राज्य घोषित किया जो जनता द्वारा गोपाल को सिंहासन पर राजमान किया गया था। यह योग्य और कुशल शासक थे।पाल वंश उत्तरी भारत का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य माना जाता है                     पाल वंश की स्थापना   पश्चिम बंगाल के खलीलपुर लेख के अनुसार कन्नौज के सम्राट हर्षवर्धन और आसाम के राजा भास्कर वर्मा के द्वारा संपूर्ण गौड़ वंश को नष्ट कर देने के बाद बंगाल में...

Punit Rajkumar actor,age,caste,janm,in Hindi

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पुनीत राजकुमार भारतीय कन्नड़ अभिनेता    सामान्य तथ्य जन्म, मृत्यु ... उन्हें मीडिया और प्रशंसकों द्वारा " पॉवरस्टार" के रूप में डब किया गया है।  वह व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में मुख्य अभिनेता के रूप में दिखाई दिए, जिनमें अप्पू (2002), अभी (2003), वीरा कन्नडिगा (2004), मौर्य (2004), आकाश (2005), अजय (2006), अरसु (2007), मिलाना शामिल हैं।  2007), वामशी (2008), राम (2009), जैकी (2010), हुदुगरू (2011), राजाकुमारा (2017), और अंजनी पुत्र (2017)।  वह कन्नड़ सिनेमा में सबसे प्रसिद्ध हस्तियों और सबसे अधिक भुगतान पाने वाले अभिनेताओं में से एक थे।  2012 में, उन्होंने गेम शो कन्नड़ कोत्याधिपति, हू वॉन्ट्स टू बी अ मिलियनेयर? के कन्नड़ संस्करण में एक टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता के रूप में शुरुआत की।                    व्यक्तिगत जानकारी Punit Rajkumar ki caste Ediga  पुनीत (जन्म लोहित) का जन्म चेन्नई में मैटिनी मूर्ति राजकुमार और पर्वतम्मा राजकुमार के यहाँ हुआ था।  वह उनका पांचवा...

jamsedji Tata biography in Hindi

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                  Jamsedji Tata                                  जीवनी जमशेदजी टाटा भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति तथा औद्योगिक घराने टाटा समूह के संस्थापक थे। भारतीय औद्योगिक क्षेत्र में जमशेदजी ने जो योगदान दिया  वह अति असाधारण और बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। जब सिर्फ यूरोपीय, विशेष तौर पर अंग्रेज़, ही उद्योग स्थापित करने में कुशल समझे जाते थे, जमशेदजी ने भारत में औद्योगिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया था। टाटा साम्राज्य के संस्थापक जमशेदजी द्वारा किए गये कार्य आज भी लोगों प्रोत्साहित करते हैं। उनके अन्दर भविष्य को भाँपने की अद्भुत क्षमता थी जिसके बल पर उन्होंने एक औद्योगिक भारत का सपना देखा था। उद्योगों के साथ-साथ उन्होंने विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के लिए बेहतरीन सुविधाएँ उपलब्ध करायीं।                       प्रारंभिक जीवन जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 में दक्षिणी गुजरात के नवसार...